दुनिया में महामारी घोषित हो चुके कोरोनावायरस को लेकर वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि चीन से पहले गत नवंबर में इटली के मरीजों में निमोनिया के अजीब केस देखे गए थे। इसका मतलब यह है कि पिछले दिसंबर में चीन में कोरोनावायरस के प्रकोप के बारे में पता चलने से पहले ही यह वायरस दूसरे देशों के कुछ हिस्सों में घूम रहा था। चीन की न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, द लेसेंट पेपर में नेशनल पब्लिक रेडियो के सह-लेखक गिउसेपी रेमुजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि 21 फरवरी को वायरस के प्रकोप का खुलासा होने के बाद इटली में सुरक्षा के इंतजाम सवालों के घेरे में आए।
रेमुजी ने कहा कि वह डॉक्टरों से इसके बारे में सुन रहे थे। रिपोर्ट में रेमुजी ने लिखा, "मुझे याद है कि बुजुर्गों में गत नवंबर-दिसंबर के दौरान बहुत अजीब निमोनिया देखा गया। इसका मतलब है कि वायरस कम से कम लोम्बार्डी (उत्तरी क्षेत्र में) में घूम रहा था, जबकि अब तक हम चीन में होने वाले इसके प्रकोप की चर्चा कर रहे थे।
इटली ने जनरल हास्पिटल कोरोनासेंटर्स में बदले यह दुनिया को सबक
रेमुजी का मानना है कि अन्य देश इटली से महत्वपूर्ण सबक सीख सकते हैं किस तेजी से उसने अपने जनरल हास्पिटल्स काे कोरोना सेंटर्स में तब्दील कर दिया। इटली में रविवार तक संक्रमण का आंकड़ा 59,138 पहुंच गया, जबकि 5476 लोगों ने जान गंवाई है। पिछले हफ्ते इटली में मौत के मामले चीन के मुकाबले करीब 30 फीसदी ज्यादा हो गए हैं। इस कारण यह वैश्विक स्तर पर इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित देश बन गया है। रविवार तक इटली में 4,825 मौतें दर्ज की गईं, जबकि चीन में अब तक कुल 3,144 मौतें दर्ज हुईं हैं।
चीन ने वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया
चीन ने कोरोनोवायरस वैक्सीन के पहले चरण का क्लिीनिकल ट्रायल शुरू कर दिया है। वहीं दुनियाभर के वैज्ञानिक इस वायरस से निपटने की जंग लड़ रहे हैं। चीन के वैज्ञानिकाें ने 16 मार्च काे वैक्सीन के परीक्षण की शुरुआत कर दी। उसी दिन अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों ने घाेषणा की थी कि उन्होंने सिएटल में काेराेनावायरस के टीके का परीक्षण शुरू कर दिया है। चीन के क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री में दिए गए दस्तावेजाें के अनुसार क्लीनिकल ट्रायल इस साल के अंत तक बाजार में आ जाएगा। प्राेजेक्ट में शामिल एक सदस्य ने रविवार को बताया कि इससे जुड़े 108 वालंटियर्स काे वैक्सीन देना शुरू कर दिया गया है। ये 18 से 60 साल आयु के हैं जिन्हें तीन समूहाें में बांटा गया है। उन्हें अलग-अलग खुराक दी जाएगी। सभी वुहान शहर के निवासी हैं। यहीं से नाेवल कोरोनोवायरस पहली बार पिछले साल के अंत में सामने आया था। काेराेनावायरस की अभी तक काेई खास दवा या वैक्सीन माैजूद नहीं है।
अमेरिका को वैक्सीन बनाने में डेढ़ साल लगेगा
दुनियाभर की दवा कंपनियां और रिसर्च लैब इस दिशा में जाेर-शोर से काम कर रही हैं। अमेरिका में काेराेनावायरस वैक्सीन बनाने में डेढ़ साल का समय लगने की बात कही जा रही है। अमेरिका स्थित गिलियड साइंसेज ने रेमेडिसवीर नामक एक एंटीवायरल ड्रग बनाया है और इसका परीक्षण एशियाई देशाें में अंतिम चरण में है। चीन में डॉक्टरों ने बताया है कि रेमेडिसवीर इस बीमारी से लड़ने में कारगर साबित हाे रहा है। गौरतलब है कि दुनियाभर में कोरोना वायरस के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। कोरोना से सबसे ज्यादा खराब स्थिति इटली की हो गई है।